Thursday, July 5, 2018

समाज की सोच का पतन

 

बुराईयों से खुद को बचायें।

आज के वर्तमान समय में हमारा समाज दिशा की ओर अग्रसर है उससे यह स्पस्ट अनुमान लगाया जा सकता है कि हमारेे समाज का अग्रिम समय निश्चित अंधकार में होगा। क्योंकि जिस प्रकार आज की पीढ़ी के व्यक्तियों की सोच में बुराई घर करके बैठी है। उससे अंदाजा लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा कि समाज किस दिशा की ओर उन्नमुख है। आज का युवा अपनी संस्कृति से इस तरह से पीछा छुड़ाता है जैसे वह कोई व्याधि हो। लेकिन उन्हें समझना होगा की हमारी संस्कृति ही नही होगी तो हमारे समाज का अस्तित्व भी समय के साथ समाप्त हो जाएगा। क्योकि संस्कृति ही किसी सभ्यता का मूल होती और जब उस पर ही आघात होगा तो सभ्यता का पतन होना निश्चित है।

      लेखक - शिवम तिवारी

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